
सुरमयी शाम थी ऐसी
हवा का झोंका इक आया
गिरी जुल्फे उठीं कुछ यूँ
कि मौसम प्यार का आया।
सुनहरी रौशनी चंदा बिखेर
हौले से मुस्काया
सितारों ने जमी तक
प्यार का सन्देश फैलाया।
मचलते बादलों ने मस्ती में
नरमी को दिखलाया
गुलाबी ठंढ की सिहरन
सभी के मन को भी भाया।
कि भौरा भी कली में
बंद हो मन ही में मुस्काया
मिला जो प्यार उसको तो
मगन हो प्रेमरस पाया।
बहुत खुबसूरत रचना !
जवाब देंहटाएंनई पोस्ट सर्दी का मौसम!
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सुन्दर रचना
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