अधखिली कली

पहाड़ी के पीछे
दिख रही थी
एक अधखिली कली
सकुचाई, थोड़ी सिमटी
बाहर आने को आतुर
अपने स्वरुप को तराशती
हवा के संग झूमती
बादलों की ओर देखती
मोहक मुस्कान बिखेरती …………….
अभी कल ही तो खिली थी
आज तोड़ ली गयी
खिलने से पहले ही
नीले आसमान ने देखा
उसकी बेबसी , लाचारी
बादलों ने गरज कर की
विरोध की तैयारी
कड़कती बिजलियों ने
शोर भी मचायी ……….
सब कुछ व्यर्थ
अनछुई न रह पायी
पहाड़ी के पीछे
अब नहीं रही
अधखिली कली ……………
पहाड़ी के पीछे
दिख रही थी
एक अधखिली कली
सकुचाई, थोड़ी सिमटी
बाहर आने को आतुर
अपने स्वरुप को तराशती
हवा के संग झूमती
बादलों की ओर देखती
मोहक मुस्कान बिखेरती …………….
अभी कल ही तो खिली थी
आज तोड़ ली गयी
खिलने से पहले ही
नीले आसमान ने देखा
उसकी बेबसी , लाचारी
बादलों ने गरज कर की
विरोध की तैयारी
कड़कती बिजलियों ने
शोर भी मचायी ……….
सब कुछ व्यर्थ
अनछुई न रह पायी
पहाड़ी के पीछे
अब नहीं रही
अधखिली कली ……………