बुधवार, 28 नवंबर 2012

     थोड़ा समय सिर्फ और सिर्फ अपने लिए

हम सभी जीवन में अपनी ही  धुन में  रहते हैं ।  बहुत कुछ पा लेने की तमन्ना होती है और हम उसी  के पीछे  भागते -भागते कब खुद  से दूर हो जाते हैं पता ही नहीं चलता । हमसे जुड़े सभी रिश्ते हमसे बहुत कुछ पा लेते हैं और अपनी दुनिया में आगे बढ़ जाते है पर हम पुनः नए रिश्तों और अपनों के बीच ही सिमटे रहते हैं । ये सही है कि जिन्दगी अकेले नहीं जी सकते , हर मोड़ पर हमें कुछ अपनों का साथ भी होना  चाहिए ।  कभी हम उनके काम आये तो कभी वो हमारे , लेकिन इन सब के बीच कुछ पल हमें अपने लिए भी रखने चाहिए जिसमे खुद के सिवा  और कोई नहीं हो। सिर्फ  अपनी बातें  हो और हो थोडा सा सुकून हो , खासकर  महिलाएं  तो अपने लिए समय कम ही निकाल पाती हैं लेकिन जिंदगी को बेहतर ढंग से जीने के लिए थोड़ा समय अपने लिए भी होना चाहिए .................       


जीवन की आपाधापी में
रिश्ते जुड़ते ही जाते हैं
हम तन्मयता को भूल गए
 अपनों में ही खो जाते हैं
कब  दिन  बीता जो अपना  था
कब पल वो केवल अपना था
कुछ बातें  करनी थी  खुद से
वो बातें कब की बीत गयी
हम अब भी मूक-बधिर बनके
बस यूँ ही देखते रहते हैं 
जीवन की आपाधापी में
रस्ते कितने मिल जाते हैं 
हम कितने दूर निकलते गए 
यह सोंचते ही  जाते हैं 
कुछ पल जो छूट  गए हमसे 
कुछ हम ही छोड़ते जाते हैं 
जीवन की आपाधापी में ..................

7 टिप्‍पणियां:

  1. हम कितने दूर निकलते गए
    यह सोंचते ही जाते हैं
    कुछ पल जो छूट गए हमसे
    कुछ हम ही छोड़ते जाते हैं
    जीवन की आपाधापी में ....

    मन के सत्य को ऊजागर करती आपकी कविता बहुत ही प्रभावित कर गई। मेरे पोस्ट पर आपका आमंत्रण है। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. भावमय करती प्रस्‍तुति

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच कहा, जीवन क दौड़ मे खुद को खोया तो क्या पाया!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़िया भाव और विचार अभिव्यक्ति .सुन्दर रचना .

    उत्तर देंहटाएं